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रक्षक (भाग : 24)

      रक्षक भाग : 24


     खण्ड 04 : तमस




वातावरण में अजीब सी मनहूसियत बढ़ती जा रही थी। अँधेरा तेजी से बढ़ता जा रहा था। उस आवाज की दिशा में आकाश में एक काली परछाई उभर रही थी।

"तुम्हे क्या लगा? तुम इन मामूली जीवो को हराकर मुझसे जीत सकते हो?" - कड़कते हुए स्वर में वह काला अक्स बोला।


"तुम सब जीत और हार की ही रट क्यों लगाए रहते हो अंधेरे के वाशिंदों?" - रक्षक ने उसी प्रकार उसके सवाल पर नया प्रश्न पूछ लिया।

"अँधेरे के बेटे को पहचानने में भूल कर रहे हो लहू पुत्र!" - तमस बोला।

"भूल या भ्रम की बातें बाद में कर लेना अंधेरे के बेटे! मुझे तुमसे मेरे एक सवाल का जवाब चाहिए।" - रक्षक ने दृढ़ता से कहा।

"और तुम्हे लगता है मैं बता दूंगा!?" - कुटिल मुस्कान लिए तमस अपने वास्तविक रूप में आकर बोला।

"तुम्हे बताना ही पड़ेगा अंधेरे के बेटे!" - रक्षक और दृढ़ होकर बोला।

"तुम्हे अनुमान भी नही कि तुम किसके सामने खड़े हो लहूपुत्र! अभी तक तुमने जिनका सामना किया वो सब मिलकर मेरी शक्ति के एक प्रतिशत अंश भी नही थे। तूफान के सामने तिनके की तरह फड़फड़ाना बन्द करो रक्षक!" - तमस एक एक शब्द पर जोर देकर बोला।

"तुम्हारी ताक़त तुम ही सम्भालो तमस! मुझे लगा था अभी और कोई आएगा, जैसे तमसा या कोई और… पर अच्छा हुआ तुम स्वयं आ गए अपनी मनहूस शक्ल दिखाने!" - रक्षक का क्रोध एक बार फिर जाग रहा था, जिसे संयम नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा था।

"तुम्हे गलतफहमी में जीने की आदत हो चुकी है रक्षक! किसी ने तुम्हे ये नाम दिया और तुम बन गए रक्षक हाहाहाहा…. कितने बड़े परिहास का विषय है ये! तुमसे कोई कहे और तुम मानकर अपनी जान दांव पर लगाने आ गए, दिखाने आ गए कि तुम रक्षक हो, तुम पहले खुद को जानते तो अच्छा होता।" - तमस, रक्षक को भावनाओ के जाल में लपेटने लगा।

"हाँ! ये सच है कि मैं खुद को नही जानता, पर अस्तित्व से अनजान नही हूँ मैं, अगर तुम्हें मेरी शक्तियों का भय नही होता तो ऐसी बहकी बहकी बातें नही करते तमस! रहा मेरा सवाल तो उसका जवाब तुम अवश्य ही दोगे। यहां युद्ध करने आये हो, युद्ध करो तमस बातें नही, आज सेना नही लाये तुम!" - रक्षक क्रोधित होते हुए बोला। 

"मैं अकेले ही तुम जैसे लाखो के लिए काफी हूँ रक्षक! आज तुम्हारे रक्षक होने का भ्रम मिटा ही देता हूँ।" - तमस बोला।

"पहले एक से तो निपट लो तमस" - रक्षक बोला।

"4J और तुम सब, कोई भी हमारे इस द्वंदके हस्तक्षेप नही करेगा। - रक्षक 4J और बाकी सैनिको से मुखातिब होकर बोला।

सब रक्षक को एक बार फिर व्यग्रता में निर्णय लेते देख परेशान हो गए, जय ने सबको समझाया कि यह रक्षक को खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर है, उसे अकेले लड़ने देना चाहिए लेकिन जब आवश्यता पड़े तो हमे तैयार रहना होगा। 

यूनिक के पुर्जे धीरे धीरे कर आपस में जुड़ते जा रहे थे, सब उसको जुड़ता देख खुश और बहुत हैरान भी थे। जय बस ये सोच रहा था  "कही इस बार का कोई झटका उल्टा न पड़ गया हो नही तो यूनिक का जीवन से जो सम्बन्ध बना है, वो बिगड़ जाएगा पर सच कहूँ तो जब ये दोनों बच्चों जैसे लड़ते हैं और मैं समझाता हूँ तो मन आत्मविभोर हो जाता है, पर देखते हैं जो भी होगा अच्छा  ही होगा।" यूनिक अब उठकर खड़ा हो चुका था। धरती के कोर को जोड़ने में काफी ऊर्जा नष्ट हुई थी धीरे धीरे वो वापस मिल रही थी, दूसरी तरफ रक्षक और तमस में युद्ध आरम्भ हो चुका था।

"यूनिक बैकअप प्लान तैयार रखना, मुझे लगता है अब उनकी भी जरूरत पड़ सकती है।" - जय यूनिक से बोला।

"जैसी आज्ञा जयदेव!" - यूनिक बोला।

"जयदेव नही यूनिक! जय" - जय बोला ' लगता है कोई पुर्जा फिर हिल गया।"

"हर एक पुर्जा हिल गया था तुम एक की बात करते हो!" - जीवन बोला।


दूसरी तरफ तमस, रक्षक पर भारी पड़ रहा था, पर रक्षक भी कोई कम नही था हर वार का जवाब पलटवार कर अवश्य ही देता परन्तु तमस की काली शक्तियों के सामने रक्षक की सारी शक्तियां व्यर्थ जा रही थी, दोनो का युद्ध देख यूनिक वहां उपस्थित सैनिको को वहां से दूर ले गया। 

ताक़त में भी तमस का कोई मुकाबला नही था, एक ऐसे शत्रु से कैसे लड़े जिसके पास सिर्फ ताक़त हो कोई कमज़ोरी नही, ऊपर से लगातार कई दिनों के लगातार युद्ध की थकान भी हो।

"अब तक मैं तुम्हे जीवित छोड़ देने की इच्छा से लड़ रहा था रक्षक! परन्तु अब तुम्हारी मृत्यु तय है।" - तमस रक्षक पर अपनी आंखों से पीले रंग की किरणों से वार करते हुए बोला। अंधेरे के प्राणी इस किरण को तम किरण कहते हैं यह किरण अपने शत्रु के संरचना को विश्लेषित कर उसका पीछा कर वार करती है, साधारण जीवो के लिए इसका स्पर्श ही मृत्युलोक पहुँचाने के लिए पर्याप्त होती है।

रक्षक इस किरण से बचने के लिए प्रकाश की गति से तेज़ भागा, धीरे धीरे उसके गति और बढ़ने लगी, रक्षक पल भर में युद्ध क्षेत्र से सैकड़ों मील दूर पहुंच चुका था, अगले पर तमस हैरान था धूल का पीछा करते हुए तम किरणे उसकी ओर ही तेज़ गति से आ रही थी, तमस कुछ भी समझ पाता इससे पहले ही वो किरण उससे टकरा गई, तमस ने कभी इसकी आशंका नही की थी इसलिए उसका वार उसी को महंगा पड़ा और वह धरती पर गिर पड़ा। उसके गिरते ही धूल रुक गयी, उसके पीछे रक्षक प्रकट हुआ।

"कहिये तमस जी, आपके परोसे खाने का स्वाद आपको कैसा लगा?" - टनक की आवाज के साथ चुटकी बजाते हुए यूनिक बोला, जो कुछ दूर खड़े होकर 4J आदि के साथ इनका युद्ध  देख रहा था।

"बकवास बन्द कर मशीनी जानवर!" - तमस को अब थोड़ा क्रोध आ रहा था।

"युद्ध मे हस्तक्षेप से मना किया है तमस जी, बात करने से थोड़े न!" - यूनिक बोला, तमस उसकी बातों का जवाब न देकर रक्षक की ओर बढ़ गया।

"इस यूनिक को क्या हुआ, सबको जी बोल रहा है।" - जॉर्ज बोला।

"पुरानी बीमारी है, अब तक तो आदत पड़ जानी चाहिए।" - जैक बोला।



"बार-बार चालाकी करके मुझसे दांव नही खेल सकते बच्चे!" - तमस भन्नाए स्वर में बोला।

"सबको मैं बच्चा क्यों लगता हूँ! और सब इस बच्चे के जान के पीछे क्यों पड़े हुए हैं?" - रक्षक बोला।


तमस अपने हाथ में अपना द्विशूल प्रकट करता है, और उसके शूलों की सहायता से रक्षक पर नीले रंग का उर्जावार करता है, जिसे रक्षक एक ओर कूदकर बच जाता है। तमस पुनः आक्रमण करता है जिसे रक्षक अपने बी रेज़ की मदद से रोक लेता है, जिसपर तमस तिलमिला जाता है, वह अपने हाथों के इशारे से धरती से एक विशाल खण्ड उखाड़कर रक्षक पर दे मारता है जिसके नीचे रक्षक दब जाता है। तमस खुश होकर हँसने लगा।

"रक्षक हाहाहाहा….. ऐसे मामूली वारो से मरने वाला रक्षक!" - जोर का अट्टहास करते हुए तमस ने कहा।

तमस अभी खुश ही हो रहा था की वो बड़ा चट्टानी खण्ड धूल में बदलने लगा, थोड़ी ही देर में रक्षक उसके सामने हवा में स्थिर था।

"बड़ा भरम है तुम अंधेरे के जीवों में, हर बार यही सोचते हो कि मर गया, जिसे सूर्य नही पिघला सका उसे तुम क्या मारोगे तमस!" - रक्षक बोला।

"तुम्हारे सूर्य जैसे हज़ारो सूर्य हैं मेरी मुट्ठी में" - तमस अपने द्विशूल को उसकी ओर तेज़ गति से फेंकता हुआ बोला।

रक्षक द्विशूल को अपनी पूरी शक्ति लगाकर रोकता है पर वह उसे धकेलता हुआ उसकी ओर बढ़ता चला आ रहा था, द्विशूल रक्षक के सीने के बिल्कुल पास आ चुका था उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि वह क्या करे।

"यह असली नही है पुत्र! खुद को पहचानो, द्विशूल केवल अत्यंत दुष्कर परिस्थिति में उपयोग लाया जाने वाला अस्त्र है, यह तुम्हे भरमाने के लिए किया जा रहा, खुद को पहचानो यह अस्त्र तुम्हे हानि नही पहुँचा सकता।" - रक्षक के मस्तिष्क में एक स्वर उभरा।

"धन्यवाद माँ!" - दोनो हाथो से द्विशूल को पकड़ उसका विरोध करते रक्षक ने उसे छोड़ दिया, यह देखकर तमस हैरान हो गया, द्विशूल रक्षक के अंदर समा गया और रक्षक अब भी सही सलामत अपने स्थान पर खड़ा था।

"कम से कम नकली अस्त्रों का प्रयोग तो मत करो तमस! वैसे भी तुम अँधेरे के प्राणियों से और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं।" - रक्षक बोला। साथ ही वह आँख बन्दकर ध्यान लगाने लगा, रक्षक के आस पास तलवारों का एक घेरा बनने लगा जो तेज़ी से घूम रहा था, रक्षक अपने हाथो से तलवार नचाते हुए हवा में ऊपर उठने लगा और तलवार को दिशा देकर तमस पर हमला कर दिया, तलवारे तेज़ गति से तमस की ओर बढ़ चली पर तमस शांत खड़ा मुस्कुरा रहा था, तलवार उसे लगने से पूर्व ही उसके सुरक्षा कवच से टकराकर छितराने लगी, पर रक्षक अब भी नही रुका।

"लगता है तुम्हारा दिमाग हिल गया है रक्षक, या मुझे कोई चीज समझकर निशानेबाजी का प्रयास कर रहे हो, तुम्हे पता है इसका कोई फायदा नही होगा।" - तमस, रक्षक से बोला।

"तुम सही समझ रहे हो तमस! निशानेबाजी का अभ्यास ही कर रहा हूँ।" - रक्षक विचित्र अंदाज़ में बोला, तमस कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसका सुरक्षा कवच टूट गया, लगातार चोट होने से उसके सुरक्षा कवच में दरार पड़ गयी जिसे रक्षक ने एक जोरदार घुसे से तोड़ डाला।

"यह कैसे हो सकता है, यह असम्भव है?" - तमस हैरान होते हुए बोला।

"यह हो सकता है तमस! बल्कि हो चुका है, कहा गयी तुम्हारी महान शक्तियां जिनके बारे में तुम बड़बड़ा रहे थे।" - रक्षक उसके गले की ओर हाथ बढ़ाते हुए बोला।

"अगर तुम यही चाहते हो तो यही सही, बहुत हो गयी आँख मिचौली, कवच के कारण मैं भी खुलकर वार नही कर पा रहा था, अब देखो तमस की असली शक्ति!" - तमस अपनी तरफ बढ़ रहे रक्षक के हाथ को पकड़कर जमीन पर पटकते हुए बोला। "बच्चे तुम तमस के सामने कुछ भी नही हो, बहुत नुकसान कर लिया तुमने मेरा अब और बर्दाश्त नही किया जाएगा।" 

रक्षक उठने की कोशिश करता है इससे पहले वो उठकर खड़ा हो पाता तमस उसे उड़ाकर दूर ले जाता है। रक्षक अपने पैरों की सहायता से उसके कैद से आजाद होता है, पर तमस उसका पैर पकड़कर जमीन पर फेंक देता है, रक्षक किसी परकटे पंछी की भांति धरती से टकराता है।

"अब से कोई तमस से टकराने की भूल नही करेगा।" - कहते हुए तमस उसपर तम किरणों से वार करता है, रक्षक अपने स्थान से हिल भी नही पा रहा था, किरणे उसके पास आ चुकी थी, पर उस तक पहुंच नही सकी, रक्षक के ऊपर एक सुरक्षा कवच बन चुका था जो तम किरणों को उस तक पहुँचने से रोक रहा था।

तमस की हैरानी बढ़ती ही जा रही थी….

क्रमशः ……..


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6 Comments

Niraj Pandey

08-Oct-2021 04:15 PM

बहुत ही शानदार👌

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Thanks

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Seema Priyadarshini sahay

05-Oct-2021 12:22 PM

बहुत सुंदर

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Thanks

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Shalini Sharma

01-Oct-2021 01:48 PM

Beautiful

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Thanks

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